Atarapee [Hindi] (अतरापी)

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जैसे जैसे जीवन के पट खुलते जाते हैं, आपके पास दो विकल्प होते हैं| एक, या तो किसी निश्चित मार्ग को पसंद कर उस पर चलने का निश्चय करें या फिर अपना मार्ग स्वयं बना लें| जीवित रहने के लिए आप किसी आकर्षक समझौते के साथ जीवन बिता दें या फिर जीवन का हर क्षण पूरी गम्भीरता के साथ जागरूक रहकर जियें| आप चुनाव कर सकते हैं कि आप चतुरता पूर्वक पीछा करते हुए जीना चाहते हैं या फिर ज्ञान की पूजा करते हुए, या फिर इस ब्रह्मांडीय बुद्धिमत्ता के आगे झुककर जीना चाहते हैं|आप चुन सकते हैं कि आपको इस पर अमल करना है, आत्मसात करना है या फिर यथास्थिति रहना है|और जीवन की इसी उधेड़बुन में अगर आप पर्याप्त सौभाग्यशाली हैं तो आप पाएंगे की आपका चुनाव मात्र एक काल्पनिक चुनाव था|

“अतरापी” (वह जो हमारे समाज से नहीं है) गुजराती में प्रकाशित इस पुस्तक का हिन्दी में अनुवाद श्रीमती मंजरी बेलापुरकर द्वारा किया गया है|

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“जब मैंने पूरी किताब पढ़ी तो महसूस किया कि मैंने पाया है एक नया सत्य, एक नयी जिम्मेदारी और एक नयी ऊर्जा|”

– टॉम आल्टर